Sunday, 17 February 2013

बलात्कार एवं उसका निवारण -डॉ दिलीप कुमार सिंह

जिस बात को न्यायाधीश कामनी ला ने हाल में ही कहा की बलात्कारियों को नपुंसक बना देना चाहिए अर्थात उनका बंध्याकरण कर देना चाहिए उस बात को मैं १९८५ ई से ही कहता अवं लिखता चला आ रह हूँ |मेरा मानना   है की ऐसे विकृत चित्त , निडर यौन अपराधी को प्रथमत: तो बंध्या क्र देना चाहिए तथा फिर से यदि वो यही अपराध करे तो उसके यौनांग काट देने चाहिए|  १९९२-९३ में मेरा जब यह लेख छपा तो जौनपुर के जिला जज श्री ओंकरेश्वेर भट्ट और यहाँ के ९०% जजों ने मेरे इन विचारों का समर्थन किया था लेकिन १०% ने इस पे बवाल भी मचाया | कारन स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं है | कुछ वर्ष पहले एक साहसी महिला  ने एक लम्पट और व्यभिचारी बाबू साहब का लिंग ही काट लिया तो वो कहीं मुह दिखने लायक नहीं रहे | और यह बात जनपद निवासी जानते हैं की इस घटना के बाद आज तक किसी ने बलात्कार का दुस्साहस नहीं किया | बलात्कार के मामले में सिर्फ कानून, पुलिस अवं प्रशासन के सहारे बैठना सही नहीं और यह इसका समाधान भी नहीं | ररूस की ड्यूमा ने यौनाचारी कोण बंध्या करने का बिल पास कर दिया है |

बलात्कार की भारतीय अवं विदेशी परिभाषा :- भारतीय दण्ड विधान  में बलात्कार धरा ३७५ में तथा अप्राकृतिक सम्भोग को धरा ३७७ में परिभाषित किया गया है ” किसी स्त्री की इच्छा के विरुद्ध ,उसकी सहमती के बिना, भय या चोट का डर दिखा के उसकी सहमती के साथ,या किसी स्त्री को पत्नी होने का विश्वास दिला के,पागल स्त्री की सहमती ले कर या उसे मादक पदार्थ खिला कर अथवा १६ वर्ष से कम की स्त्री के साथ सहमती के साथ मैथुन बलात्कार कहलाता है | यहाँ यह ध्यान देना चैये की मैथुन के लिए लिंग प्रवेश काफी है |

बलात्कार में प्रेम या मित्रता साबित हो जाने पे वोह बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता | यधपि केवल पीडिता के बयान पे भी सजा हो सकती है | बलात्कार की न्यूनतम सजा ७ साल से लेकर आजीवन कारावास तक की है  |

बलात्कार के कारण  :-बलात्कार एक ऐसी सामाजिक बीमारी है जिसका जन्म ही मानव सभ्यता के सतत साथ हुआ है | देव,दानव ,यक्ष ,राक्षस ,  मानव, गन्धर्व सभी के समाजों में बलात्कार होता आया है | वास्तव में बलात्कार बड़ी ही जटिल सामाजिक समस्या है जिसका कारन भी खोज पाना हमेशा संभव नहीं होता |

गहनतम सर्वेक्षन अवन शोध यह बताते हैं की केवल ५% मामले ही वास्तव में बलात्कार होते हैं बाकी  दोनों पछों की सहमती से,लालच ,स्वार्थ,के वशीभूत हो कर किये जाते हैं| पकडे जाने पे इसका दोष केवल पुरुष पे दाल दिया जाता है क्योंकि स्त्री को बलात्कारी या व्यभिचारी माना  ही नहीं गया है | अब पुरुष पर यह भार होता है की वोह साबित करे की उसने बलात्कार जैसा जघन्य अपराध नहीं किया है बल्कि यह सहमती से हुआ है | अनुभव अवन शोध यह भी बताते हैं की इस प्रकार की शिकायतों में पहल स्त्री ही करती है जो बाद में बलात्कार का कारन बनती है |

इस विषय पे खुलकर यह बात सामने नहीं आ पति है की बलात्कार किन कारणों से हुआ है क्योंकि पीडिता खुलकर इसका वास्तविक कारन नहीं बताती है | यह भी ध्यान देने वाली बात है की बलात्कारी पे  विशवास नहीं किया जा सकता | इस विषय पे स्वतंत्र रूप से सर्वेक्षन बहुत कम हुई हैं और समाज खुल कर इस विषय पे सबके सामने नहीं बोलता | अधिकतर नतीजे किसी न किसी दबाव के साथ आते हैं कभी दबंग पुरुष प्रधान का दबाव और कभी महिलाओं की संस्थाओं का दबाव | सत्य जैसे कोई सुनना या जानना ही नहीं चाहता हो|

कामिनी झा की बात से मैं पूर्ण सहमत हूँ की बलात्कारी एक जीवित मानव बम है और बलात्कार साबित होने पे बलात्कारी को बंध्या कर देना चाहिए या उसके गुप्तांग कार देने चाहिये ताकि वो ऐसी घटनाओं पे अंकुश लग सके |

लेखक  Dr. Dileep Kumar Singh Juri Judge, Member Lok Adalat,DLSA, Astrologist,Astronomist,Jurist,Vastu and Gem Kundli Expert. Cell:९४१५६२३५८३

सियासत की राहों पे चलना संभल कर | —लेखक डॉ दिलीप कुमार सिंह

सियासत की राहों पे चलना संभल कर | —लेखक डॉ दिलीप कुमार सिंह

कहते हैं कि राजनीती में कोई किसी का नहीं होता और अभी तक के अनुभव भी कुछ ऐसा ही सिद्ध करते हैं |देखने में यह भी आया है कि एक ही घर के लोग अक्सर अलग अलग राजनितिक दल से सम्बन्ध रखते हैं |स्वतंत्र भारत इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है जहां पर प्रारंभ में केवल कांग्रेस जनसंघ,वामदल अवं कुछ अन्य दल ही थे लेकिन आज इन्ही ४-५ दलों से सैकड़ों पार्टियाँ बन गयी हैं | राजनीती में सफलता पाने हेतु नैतिकता विहीन अवसरवाद सबसे बड़ा हथियार है | राजनीती की इस बलिवेदी पे इदिरा गाँधी,राजीव गाँधी,संजय गाँधी ,लाल बहादुर शास्त्री ,पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहित जा जाने कितने चढ़ गए |इसीलिये राजनीती को “लखैरों की अंतिम परिणीती” कहा जाता है जहाँ सब कुछ जायज़ है |

राजनीति में आने वाले कितने ही लोग “बिना पेंदी के लोटे जैसे हुआ करते हैं |इसमें पता नहीं कब आक़ा समर्पित से समर्पित कार्यकर्ताओं,पदाधिकारियों ,सांसदों,विधायकों को निकाल फेंके और यह भी पता नहीं होता की घोर से घोर दुश्मन कब मिल जाए | इसी समझने के लिए सपा –बसपा ,सपा-भाजपा,सपा-कांग्रेस ,भाजपा-ममता ,जयललिता-कांग्रेस जैसे गठजोड़ों को देखें |राजनीती में कोई भी चीज़ स्थाई अथवा अपनी नहीं हुआ करती |श्रीमती मेनका गांघी का उदाहरण द्रष्टव्य है जो कांग्रेसी खानदान से होते हुए भी घोर भाजपाई हैं और उनका बीटा वरुण गाँधी भी उनके साथ है |

आज राजनीति का मुख्य लक्षया सफलता प् के येनकेन प्रकारेण कुर्सी हथिया के अपना कल्याण करना रह गया है भले ही इसके लिए जनकल्याण,समाज कल्याण का नारा दिया जाए |विश्व राजनीती भी कुछ इस से अलग नहीं है जैसे अटल बिहारी बाजपेयी ने सम्बन्ध सुधारने के लिए पाकिस्तान की यात्रा की और उसके बाद ही कारगिल युद्ध हो गया |कभी नेहरु हिंदी चीनी भाई भाई का नारा लगवा के गदगद होते हैं तो दूसरी तरफ चीन भयंकर आक्रमण देश का लाखों वर्गमील हड़पकर बार बार भारत को धमका कर उसकी सीमाओं में घुसने की फ़िराक में रहता है }चीन अमरीका के सम्बन्ध एक दुसरे से अच्छे न होते हुए भी एक दुसरे से सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार है| बंगला देश को आज़ाद करवाने वाले भारत के लिए आज बांग्लादेश ही सरदर्द बना हुआ है |कभी घूर दुश्मन रहे पूर्वी अवं पश्चिमी जेर्मनी का तथा कई अन्य देशों का विलय हो चुका है | रूस का पतन अवं वेघ्तन हो चुका है | इसी को सियासत की कठिन राहें कहते हैं जिनपे संभल के चलना आवश्यक है |

 

लेखक  Dr. Dileep Kumar Singh Juri Judge, Member Lok Adalat,DLSA, Astrologist,Astronomist,Jurist,Vastu and Gem Kundli Expert. Cell:९४१५६२३५८३

Thursday, 14 June 2012

सूर्य किरणों द्वारा अग्नि वर्षा कब तक?

DSC01882

कूलर की छत पे ठंड का एहसास करता पंछी

इस समय ज्येष्ट माह का उत्तराई तथा जून माह का प्रथमार्ध चल रहा है | समूचे भारत विशेषकर मध्य उत्तर एवं पश्चिम में गर्मी अपने चरम पे पहुँच गयी है | हफ़्तों से ताप ४४- ४९ डिग्री सेंटीग्रेट के बीच झूल रहा है | मानव तो मानव पशु पक्षी एवम पेड़ पौधे तक आग बरसती सूर्य कि किरणों से झुलस रहे हैं | गर्मी से अभी रहत नहीं मिलनी है |मैंने पहले भी लिखा था कि १० मई से ५ जून तक गर्मी कि तीव्रता एवं उग्रता बढती ही जाएगी तथा ताप ४६- ५० डिग्री सेंटीग्रेट पहुँच जाएगा | जून में आंधियों, बवंडरों ,तूफ़ान की अधिकता रहेगी | इन सब का क्या कारण है?

 

इस वर्ष सूर्य आकाशगंगा के परिक्रमापथ पर विशिष्ट बिंदु पर है जिससे ओजोन परत एवं ब्रहमांडइय किरणों कि तीव्रता एवं उग्रता बढ़ेगी| सूर्य कि सीढ़ी पड़ती किरणे भारतीय भूभाग ही नहीं अपितु अरब प्रायदीप सहारा, तिब्बत, नेपाल भूतन एवं भूमध्य सागरीय देशों एवं मध्य दक्षिणी यूरोप ,एवं मेक्सिको तबा के रख देगी| गर्मी कि उग्रता २१ जून तक यथावत रहेगी |जून के प्रथमार्थ में २-३ वर्षा एवं आंधियां गर्मी से रहत देगी| बाजार कि स्थिति भी डांवाडोल रहेगी |

 

झुलसाने वाली इस गर्मी के विश्वभर में तीन प्रमुख करण हैं जिनपर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है | यह कारण हैं भीषण प्रदूषण ,भूगर्भ का गिरता जल स्तर ,तथा वनों का विनाश | जल थल वायु, मृदा ,रेडियो एक्टिव अवन इलेक्ट्रानिक कचरा प्रदूषण ,प्लास्टिक एवं औधोगिक रसायनों के प्रदूषण के करण गर्मी असहनीय होती जा रही है |५० वर्ष में ही गिरता भूजल स्तर पाचों फिट नीचे भाग चुका है अत: धरती शुष्क होने से गर्मी और सर्दी दोनों अधिक पड़ रही है |पेड़ पौधों कि अन्धाधुन कटाई ने हरी भरी धरती को शुष्क ,उजाड और वीरान बना कर चयाराहित और गर्म कर दिया है |मौसम विज्ञानी,वैज्ञानिक चाहे कुछ भी कहें पर इस समय छायादार कमरे का ताप ४७-४८ डिग्री सेंटीग्रेड तथा छत  पे रखे थर्मामीटर  का ताप ६० डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर तक मैंने खुद नापा है |

मेरा तो यही कहना है कि इस वर्ष मानसून भी “सामान्य” न हों कर  असामान्य रहेगा | एक तिहाई भारत अकाल और सूखे का तो दो तिहाई भारत बाढ़ कि विभीषिका झेलेगा | तडित,झंझा,समुद्री लहरों ,प्रबल भूकंपो ,ज्वालामुखी विस्फोटों से वर्षा ऋतु में प्रबल हानि होगी|

अनुमान है कि अंदमान में ३१ ,केरल में २-५ जून तक ही मानसून आएगा | भारत में एक प्रबल भूकंप का योग है |रोहिणी से शुरू यह गर्मी २१ जून तक पड़ती रहेगी और तब तक उत्तेर भारत में मानसून प्रवेश कर जाएगा |यूँ तो गर्मी  का प्रकोप सितम्बर तक रहेगा लेकिन वर्षा के करण बीच बीच में काफी रहत मिलती रहेगी |

लेखक:

DSC01160

Dr. Dileep Kumar Singh Juri Judge, Member Lok Adalat,DLSA, Astrologist,Astronomist,Jurist,Vastu and Gem Kundli Expert. Cell:९४१५६२३५८३

Tuesday, 12 June 2012

मेरे अपने शहर में बड़े लोग

मेरे अपने शहर में बड़े लोग : डॉ दिलीप सिंह

 

4_१९८० इ० में अपने गांव गैरवाह से जौनपुर नगर में बसने के साथ साथ मुझे पहला अंतर मिटटी और सुगंध में मिला| कुछ समय बाद ही प्रख्यात शहरी शख्सियतों के साथ किला घूमने का कार्यक्रम बना| एक बार जो किला गया तो आज तक वहाँ जाना अनवरत जारी है| शर्की काल में बना यह किला कई माने में बेजोड और कई रहस्यों को अपने में समेटे हुए है |तंत्र मंत्र , ज्योतिष, मौसम का गहन अह्येता होने के कारण नेने कई बार वास्तव में इन रहस्यों का साक्षात अनुभव घोर वर्षा, प्रचंड गर्मी, विकट ठण्ड में किया है | खण्डहर एवम टीले पर आदिगंगा गोमती के पवन तट पर बना यह किला जीर्ण शीर्ण होता जा रहा है और ढहता जा रहा है | पर किसी को इसकी चिंता नहीं है | कागजी कार्यवाही में तो सब कुछ ठीक बिलकुल ओ. के. है|

१९८०-१९८१ में यह किला काफी ठीक हालत में था |तब यहाँ कि भूल भुलैया खुली थी | वंही से एक सुरंग अंडे कि और जाती है जिसके बारे में कथाएँ हैं कि यह गोमती पार निकलती है और कुछ तो इसे दिल्ली के लालकिले से  जुडा मानते हैं|  १९८० में जब मुझे किला घूमने का अवसर प्राप्त हुआ तब से लेकर अब तक इस किले में एक से बढ़ कर एक नेता ,कलाकार,साहित्यकार, आमजन, नमाज़ी, चित्र विचित्र लोगों को देखते २२ वर्ष गुज़र गए |

सुबह एक साथ आप यहाँ आज भी दो कुंतल से आधा कुंतल तक के लोगों को भागते दौड़ते ,हांफते ,गिरते पड़ते ,कसरत व्यायाम करते ,प्राणायाम करते ,योग से लेकर भोग करते अपनी आँखों से यथार्थ में देख सकते हैं |जाकी रही भावना जैसी हरी मूरत देखि तिन तैसी “ यहाँ चरितार्थ होता है| प्रेमी युगल से वृद्ध युगल ,योगी से भोगी सभी इस विशाल दुर्ग में विधमान हैं|  यहाँ के सभी कर्मचारी प्रातः घुमक्कड (मार्निंग वाकर्स) के अभ्यस्त हैं | यहाँ आप अशोक सिंह से लेखर संजय अस्थाना, के. एस. परिहार से मोहम्मद अब्बास जैसों को मोर्निंगवाल्क करते देख सकते हैं |सबसे पुराने घुमक्कड़ से लेकर १ दिन वाले घुमक्कडो को भी यहाँ देखा जा सकता है |

मुख्य बात तो अभी बाकी है और वो यह कि नगर के विख्यात तमाम व्यक्तियों की कथनी और करनी का अंतर भी यही इसी किले में देखने को मिलता है |पहले पूर्ण स्वच्छ समीर भरा यह किला अब दिनों दिन कूड़ा कचरा और गंदगी से पटता जा रहा है और हमारे नगर के प्रसिद्ध लोग ही इसके जनक हैं |प्रेमी युगलों कि सक्रियता दिनों दिन यहाँ रोज वेलंटाइन डे या मधुयामिनी का भास् कराती है यदि आप ७ बजे के बाद तलाहने जाएँ | किले में भवनों के भीतर ही मलमूत्र त्याग कर हमारे शहरी लोग अनार ,नीबू , संतरा ,से मिश्रित जो सुगंध बिखेरते हैं उस से किले में लाल हरे नीले पीले सतरंगी चंपा, बेला चमेली कनेर गुडहल आदि कि खुशबु वैसे ही खो जाती है जैसे ब्रहमास्त्र में सरे अस्त्र खो जाते हैं | जम्दाग्निपुर,जवनपुर से जौनपुर कि गाथा देखने वाली गोमती नदी अब प्रदूषण से पटी सहमी सी दिखती है | इमामबाड़े के पास बड़े पेड़ के नीचे  एक नाग रोज बैठा मिलता है जो मूकदर्शक है इसका|

DSC01160

Dr. Dileep Kumar Singh Juri Judge, Member Lok Adalat,DLSA, Astrologist,Astronomist,Jurist,Vastu and Gem Kundli Expert. Cell:९४१५६२३५८३

Sunday, 10 June 2012

वास्तव में हज़रत मुहम्मद साहब एक दिव्य प्रकाश पुंज हैं- डॉ दिलीप सिंह

alq2विश्व में एक से बढकर एक महापुरुष पैदा हुए हैं | भगवन श्री राम, कृष्ण, महावीर स्वामी,गौतम बुध , हज़रत मुहम्मद साहब,गुरु नानक, हज़रत ईसा मसीह, हज़रत मूसा ,कन्फयुशियास ,लाआत्स, ऐसे ही महापुरुष हैं | इसमें से ईसाई धर्म के प्रवर्तक हज़रत इसा मसीह ,इस्लाम धर्म के चलानेवाले हज़रत मुहम्मद साहब,सिख पंथ के गुरुनानक देव, बोद्ध एवं जैन धर्म के गौतम बुध एवं महावीर स्वामी का नाम आज के आधुनिक युग में अनुकरणीय है |

बारावफात संसार भर में फैले सभी मुस्लिम बंधुओं का प्रमुख पर्व है क्योंकि इसी दिन हज़रात मुहम्मद साहब का अविर्भाव हुआ तथा इसी दिन तिरोधान भी हुआ था | बारावफात को ईद- ए- मिलादुन नबी भी कहते हैं |

हज़रत मुहम्मद साहब का जन्म अरब देश के मक्का नगर में आज से लगभग १४४० वर्ष पूर्व ५७० इ० में हुआ था उनकी माता का नाम अमीना बेगम तथा पिता का नाम अब्दुल्ला था | उनकी माता का अवसान हज़रत मुहम्मद साहब कि छोटी सी उम्र में ही हों गया था इसी कारण उनकी परवरिश उनके चाचा अबुतालिब के घर हुई |वे कुरैशी घराने में पैदा हुए थे | हज़रत मुहम्मद साहब के जन्म के समय अरब देश में भयंकर रक्तपात और झगडे हुआ करते थे| पूरा अरब समाज छोटे बड़े सैकडो कबीलो में बंटा हुआ था | बाल विवाह बहुदेवाद ,मूर्तिपूजा एवं अन्धविश्वास फैले हुए थे| लड़कियां युद्ध और विवाद का कारण बनती थी इसलिए लोग लड़कियों के पैदा होते ही ज़मीन पे जिंदा गाड देते थे | बात बात में खून खराबा हों जाना एक आम सी बात थी| कहा जाता है कि उस समय मक्का में ८०० से अधिक देवी देवताओं की मूर्तियां हुआ करती थी|

इन्ही विकट और भयंकर परिस्थितियों में हज़रत मुहम्मद साहब का जन्म हुआ | वे पहले बकरियाँ चराया करते थे | बड़े होने पे उन्होंने अपने चाचा के साथ  व्यापार करना शुरू किया |धीरे धीरे उनकी ईमानदारी के चलते उनकी ख्याति दूर दूर तक फैल गयी | उनकी शादी धनी महिला जनाब इ खादिजा के साथ हों गयी| वे बचपन से ही गहन चिन्तक में लीन रहा करते थे और सोंचा करते कि किस तरह अरब में फैली बुराईयों को दूर किया जा सकता है ? वे अक्सर मक्का में स्थित “हिरा” नाम की गुफा में जाकर घंटों गहन चिंतन मन में डूब जाया करते थे |उसी क्रम में एक दिन देवदूत जिब्रईल प्रकट हुए और  उस अल्लाह के नाम से जिसने इस सारी दुनिया को बनाया है हज़रत मुहम्मद साहब को दिव्य ज्ञान प्रदान किया , जो कि अल्लाह का दिया हुआ था | उस  दिव्य ज्ञान को प्राप्त करते ही हज़रात मुहम्मद साहब ने इस्लाम धर्म का प्रचार शुरू कर दिया |

प्रारम्भ के दिनों में उन्हें अनेक कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ा जिसमे कई बार उनके प्राण भी संकट में पड़ जाया करते थे पर उन्होंने हार नहीं मानी | प्रचार प्रसार के इसी क्रम में उनके शत्रुओं कि संख्या भी बढती जा रही थी |लेकिन मदीना में उनकी लोक्रियता अनवरत बढती जा रही थी | एक दिन उनके शत्रुओं ने मक्का में उनको मारने का निश्चय कर लिया लेकिन हज़रत मुहम्मद साहब को उनके विश्वासपात्रों के द्वारा इस बात का पता चल गया और वो अपनी जगह हज़रत अली को सुला के अपने मित्र अबुबकर के साथ रात में ही मदीना चले गए |यह महायात्रा हिजरत कहलाई और इसी समय से हिजरी सन शुरू हुआ |

जब शत्रुओं ने देखा कि बिस्तर पे हज़रत मुहम्मद साहब कि जगह हज़रत अली लेटे हैं तो वो समझ गए कि हज़रत मुहम्मद साहब बच निकले तब शत्रुओं ने उनका  पीछा करना शुरू किया | एक स्थान पे शत्रु बहुत करीब आ गया तो अबुबकर घबरा गए और दोनों एक गुफा में जाकर छिप गए|  यह एक चमत्कार ही था कि उनदोनो के गुफा में जाते ही गुफा द्वार पे मकड़ी ने जाला लगा दिया और कबूतर ने अंडे दे दिए | शत्रुओं ने गुफा द्वार पे मकड़ी के जाले और अंडे देखे तो समझे यहाँ कोई नहीं आया है |

हज़रत मुहम्मद साहब की लोकप्रियता उनकी ईमानदारी और इंसानियत के पैगाम देने के कारण बढती गयी और वो एक के बाद एक शत्रुओं को जीतते गए और जल्द ही मक्का भी जीत लिया | एक मशहूर किस्सा उनके जीवन का है कि एक बुढिया हज़रत मुहम्मद साहब कि राह में क्रोधवश रोजाना कांटे फेका करती थी | एक दिन बीमारी के कारण उसने कांटे नहीं फेंके तो  हज़रत मुहम्मद साहब ने लोगों से पुछा और जब पता लगा कि वो  बुढिया बीमार है तो उसका हाल चाल पूछने उसके  घर गए| वो बुढिया द्रवित को के उनकी अनुयायी बन गयी |

हज़रत मुहम्मद साहब कि लोकप्रियता और इस्लाम धर्म का दायरा बढ़ता गया और उनके अवसान के बाद उनके    उत्तराधिकारियों ने इस काम को जारी रखा और यह धर्म पुर्तगाल, अरब, फ़्रांस ,भारत, इंडोनेशिया ,मलेशिया ,अफ्रीका तक फैल गया | आज लगभग १६० करोड इसके अनुयायी हैं|

एक अल्लाह कि इबादत, सच्चाई ,ईमानदारी,भाईचारा, शांति,महिलाओं की इज्ज़त, इंसानों की आपसी बराबरी इत्यादि इस्लाम धर्म की प्रमुख शिक्षाएं हैं| आज कुछ लोग भले ही इस्लाम के मूल सिधांतों से हट कर इस शांति के धर्म को आतंक का जामा  पहनाकर इसे बदनाम करने पे लगे हैं लेकिन हज़रात मुहम्मद साहब कि महागाथा और सिधांतों के कारण जल्द ही ऐसे लोग बेनकाब होंगे|

वास्तव में हज़रत मुहम्मद साहब एक दिव्य प्रकाश पुंज हैं जिनके अलोक से इस्लामी जगत आज भी जगमगा रहा है.

DSC01147

लेखक : डॉ दिलीप कुमार सिंह

(न्यायविद, ज्योतिर्विद )